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भारतीय रेलवे एक प्रबंधन तंत्र के
अंतर्गत एशिया का सबसे बड़ा और
विश्व का दूसरा सबसे बड़ा
रेल नेटवर्क
है। देश के विशाल
भू-भाग में चारों ओर
फैला
भारतीय रेलवे का मल्टी-गेज
नेटवर्क,
मल्टी-ट्रेक्शन सिस्टम लिए
है, जो एक लाख ट्रैक
किलोमीटर से अधिक क्षेत्र
कवर करता है, इसमें 300
यार्ड, 2300
गुड्सशैड और 700
रिपेयर शॉप
हैं। इसके चल स्टॉक बेड़े
में 8300 रेलइंजन, 39,000 सवारी डिब्बे और 3.5
लाख
मालडिब्बे हैं। इसके कर्मचारियों की
संख्या 1.65 मिलियन है और
यह प्रतिदिन
लगभग 11,000 गाड़ियों का
परिचालन
करती है, जिसमें 7,000
यात्री
गाड़ियां हैं। पिछले चार
दशकों में भारतीय रेलवे के
माल यातायात में सराहनीय वृद्धि हुई है।
पिछले
कुछ वर्षों में विशेष वृद्धि हुई है।
1950-51 में केवल 93 मिलियन टन के
प्रारंभिक माल यातायात से 304%
बढ़कर रेलवे का प्रारंभिक
माल यातायात
1992-93 में 376 मिलियन टन हुआ
है। यह स्थिति यात्री
यातायात के निरंतर
बढ़ते दबावों के बावजूद
रही है
जबकि समान अवधि
में यात्री यातायात
1.28 बिलियन यात्रियों से बढ़कर 4.2
बिलियन हुआ है, इससे भारतीय
रेलवे विश्व में यात्री परिवहन
में अग्रणी
रेलवे बन सकी है। वर्ष 2000
में माल यातायात में 63% और
यात्रा यातायात में 60% की और वृद्धि होने की
संभावना है। इन वृहद और चारों
ओर फैली परिसंपत्तियों को
पूरी
क्षमतानुसार काम में
लाना और
विकसित होती अर्थव्यवस्था
में
बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को
पूरा
करना और भारतीय रेलवे को एक
जटिल साइबरनेटिक
सिस्टम बनाना
कोई आसान काम नहीं है।
पिछले
वर्षों में, भारतीय रेलवे
ने अपनी चल संपत्तियों की
मॉनिटरिंग में
सहायता के लिए एक व्यापक और
बेहतर मैनुअल इन्फोर्मेशन
सिस्टम स्थापित किया है। एक समर्पित वॉयस
कम्यूनिकेशन सिस्टम की सहायता
से,
रेलवे देश के दूरस्थ
स्थानों से
सूचनाएं एकत्र करके उन्हें अधिकतम
मात्रा में नियंत्रण केन्द्रों को भेजती है।
परिचालन
के आकार और जटिलताओं, बढ़ते
यातायात
और बदलती तकनीकों
ने निर्विवाद रूप से इस
मैनुअल सिस्टम पर भारी
बोझ डाला है। अत: कुछ समय के
लिए इसके आधुनिकीकरण की
आवश्यकता महसूस की गई
थी।
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